डॉक्टर बनकर गांव के हीरो बने मोहम्मद वशीर

कोटा उसके पिता किसान हैं, परिवार की आर्थिक स्थति खराब है। वह सरकारी स्कूल में हिंदी माध्यम से पढ़ता था। परिवार और आसपास के गांव में भी कोई भी डॉक्टर नहीं था, लेकिन उसने सपना देखा कि डॉक्टर ही बनाना है। पहली कोशिश में वह बुरी तरह विफल रहा पर उसने हिम्मत नहीं हारी। हौसला जुटाकर फिर एग्जाम दिया। अब वह अच्छे सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेकर अपना सपना पूरा करेगा।
हम बात कर रहे हैं सारंगपुर के गांव खुर्द के मोहम्मद वशीर की। मोहम्मद वशीर ने कोटा के मोशन एजुकेशन से नीट की कोचिंग ली है। वह बारहवीं पास कर कोटा आया था। पहले साल उसको नीट में केवल 272 अंक मिले, लेकिन वह असफलता से घबराया नहीं। गलतियों से सबक लेकर उसने नए सिरे से कोशिश की और इस बार 637 अंक प्राप्त किए। पिछले साल जो रैंक 3 लाख 72 हजार थी, वह इस साल 4 हजार हो गई। मोशन के संस्थापक और सीईओ नितिन विजय ने बताया कि मोशन टॉप रैंक के लिए कम, अधिक सलेक्शन रेशियो के लिए ज्यादा जाना जाता है। मोहम्मद वशीर जैसे बच्चों की सफलता को ही हम अपनी असल कामयाबी मानते हैं।


मोहम्मद वशीर ने बताया कि हम पांच भाई बहन हैं। मैंने और बड़े भाई ने दसवीं पास की तो पिताजी ने कहा कि परिवार की आर्थिक स्थति ऐसी है कि हम दोनों में से एक ही पढ़ सकता है। एक भाई को उनके साथ खेती में लगाना होगा। पढऩे में बड़े भैया भी अच्छे थी, लेकिन उन्होंने बिना समय लगाए कह दिया कि छोटे को पढ़ाओ। आज मेरा सलेशन हुआ तो वह बड़े भाई के त्याग से ही हो पाया है।
मोहम्मद वशीर ने बताया कि तैयारी के दौरान अक्सर रविवार के दिन मां का फोन आता था। कभी निराश होता तो वह एक ही बात कहती थी, तुम टेंशन मत लो। बस अपनी पूरी कोशिश करो, सब ठीक होगा। मां का भरोसा और पिताजी को कठोर परिश्रम करते देख, मुझे पढऩे के लिए नई ऊर्जा मिलाती थी। जब भी गांव जाता तो लोग हालचाल जानने के बाद एक ही सवाल करते थे, डॉक्टर कब बन रहे हो। इस बार सलेक्शन ने पूरे गांव को खुश कर दिया और खूब मिठाइयां बंटी

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